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मानवता और विज्ञान का अनूठा संगम

दधीचि देह दान समिति के प्रयासों से एम्स, लेडी हार्डिंग और मौलाना आजाद में रचा गया इतिहास

राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में 'भ्रूण दान' (Foetus Donation) के क्षेत्र में एक नई क्रांति देखी जा रही है। दधीचि देह दान समिति के कुशल मार्गदर्शन और विभिन्न परिवारों के अदम्य साहस के चलते, दिल्ली के बड़े अस्पतालों ने अपने इतिहास के पहले और दुर्लभ भ्रूण दान स्वीकार किए हैं। ये घटनाएं न केवल परिवारों के निस्वार्थ भाव को दर्शाती हैं, बल्कि चिकित्सा शोध के लिए एक नया मार्ग भी प्रशस्त करती हैं।

दुख की घड़ी में ऐतिहासिक निर्णय: एम्स और लेडी हार्डिंग में पहले दान

इस गौरवशाली यात्रा की शुरुआत 6 सितंबर को हुई, जब एम्स (AIIMS) के इतिहास में पहला भ्रूण दान दर्ज किया गया। श्रीमती वंदना जैन और श्री आशीष जैन ने गर्भपात के गहरे दुख के बावजूद चिकित्सा विज्ञान के लिए यह ऐतिहासिक कदम उठाया। इसके बाद 10 अक्टूबर को लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज (LHMC) के रिकॉर्ड में एक और अध्याय जुड़ा, जब नोएडा के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज और डॉ. दिव्या ने पांच माह के 'जुड़वां भ्रूण' दान कर दिए। एक डॉक्टर दंपति द्वारा लिया गया यह निर्णय चिकित्सा बिरादरी के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया। इसी कड़ी में 21 सितंबर 2026 को श्रीमती अन्नपूर्णा मिश्रा और उनके परिवार ने मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (MAMC) में एक दुर्लभ भ्रूण दान कर मानवता की मिसाल पेश की।

दधीचि देह दान समिति का समर्पित योगदान

इन सभी ऐतिहासिक दान के पीछे 'दधीचि देहदान समिति' की भूमिका एक मजबूत सेतु के रूप में रही है। चाहे एम्स में दिन भर चलने वाली जटिल दस्तावेज़ीकरण प्रक्रिया हो, या लेडी हार्डिंग में रात भर चला संचार का सिलसिला, समिति के उत्तर क्षेत्र संयोजक श्री जी.पी. तायल और उपाध्यक्ष श्री सुधीर गुप्ता ने अथक परिश्रम किया। समिति ने न केवल शोक संतप्त परिवारों को संबल दिया, बल्कि अस्पतालों के साथ त्वरित समन्वय कर यह सुनिश्चित किया कि दान की प्रक्रिया तकनीकी बाधाओं के बिना पूरी हो सके। जब तकनीकी कारणों से एम्स दान स्वीकार करने में असमर्थ रहा, तो समिति ने तुरंत मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के साथ तालमेल बिठाकर मिश्रा परिवार की इच्छा को सम्मान दिलाया।

महर्षि दधीचि के आदर्शों पर चलते हुए, समिति न केवल देह दान और अंग दान को बढ़ावा दे रही है, बल्कि भ्रूण दान जैसे अत्यंत दुर्लभ योगदानों के माध्यम से भविष्य के डॉक्टरों और वैज्ञानिकों के लिए शोध के नए द्वार खोल रही है। चिकित्सा जगत इन साहसी परिवारों और समिति के इस निस्वार्थ मिशन को नमन करता है।