60वां देहदान उत्सव-दधीचि देहदान समिति का 60वां देहदान उत्सव गरिमामय वातावरण में संपन्न

दधीचि देहदान समिति, उत्तरी क्षेत्र द्वारा 28 दिसंबर 2025 को आयोजित 60वां देहदान उत्सव शहीद सुखदेव कॉलेज ऑफ बिजनेस स्टडीज, रोहिणी में अत्यंत गरिमामय, प्रेरणादायक एवं आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ शंखनाद, वैदिक मंत्रोच्चारण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। समिति के संयोजक श्री जी. पी. तायल ने मंचासीन सभी गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया, वहीं कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ. पूनम वर्मा का औपचारिक स्वागत श्रीमती गीता आहूजा द्वारा किया गया। समिति के महामंत्री डॉ. विशाल चड्ढा ने समिति की स्थापना (1993, अमृतसर मेडिकल कॉलेज) का उल्लेख करते हुए देहदान एवं अंगदान के मानवीय और चिकित्सीय महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत सरकार इस पुनीत कार्य को पूर्ण समर्थन दे रही है तथा शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता अभियानों को विशेष महत्व दिया जा रहा है। उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए एम्स में प्रथम हृदय प्रत्यारोपण एवं नेत्रदान में हुई उल्लेखनीय प्रगति की जानकारी भी साझा की।

कार्यक्रम में समिति के सदस्यों की निस्वार्थ, निरंतर और समर्पित सेवा-भावना को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। इस अवसर पर सभागार में प्रेरक नारा गूंजा— “चलो, मरने के बाद भी जीने का इंतजाम करते हैं।” समिति की उपाध्यक्ष श्रीमती मंजू प्रभा ने देहदान करने वाले परिवारों को स्मृति-चिह्न भेंट कर उनके त्याग एवं समाज के प्रति अमूल्य योगदान के लिए आभार व्यक्त किया। कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ. पूनम वर्मा ने समिति के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को सशक्त करते हैं। उन्होंने कहा कि किसी के काम आ सके, यही सबसे बड़ी प्रार्थना है। उन्होंने आयोजन के लिए कॉलेज को चुने जाने को संस्थान के लिए गर्व का विषय बताया।

इस अवसर पर डॉ. अनिल अग्रवाल, माननीय प्रांत संघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने देहदान, अंगदान एवं नेत्रदान के तकनीकी पक्ष को सरल एवं सहज भाषा में समझाया। उन्होंने देहदान को समर्पण और बलिदान का सर्वोच्च रूप बताते हुए महर्षि दधीचि, शहीद सुखदेव, गुरु तेग बहादुर और राजा शिबि जैसे महान उदाहरणों के माध्यम से भारतीय परंपरा में त्याग की महत्ता को रेखांकित किया। श्री हर्ष मल्होत्रा, संरक्षक, दधीचि देहदान समिति एवं माननीय केंद्रीय राज्य मंत्री, भारत सरकार ने अपने प्रेरक मार्गदर्शन से कार्यक्रम को नई दिशा प्रदान की। वहीं श्री विनय आर्य, महामंत्री, दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा, ने ऐसे आयोजनों की सामाजिक एवं धार्मिक प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए समाज में प्रचलित भ्रांतियों का सरल शब्दों में समाधान प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम में डॉ. गौरव ठाकरे (इंदौर), डॉ. एस. के. अरोड़ा, डॉ. अतुल गुप्ता, श्री नंद किशोर, श्री जी. पी. गोयनका, श्री राकेश तथा गुरु नानक अस्पताल के चिकित्सकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। श्री विनोद अग्रवाल, उपाध्यक्ष ने मंच संचालन को सादगी एवं शालीनता के साथ निभाया। कार्यक्रम के अंत में श्री जी. पी. तयाल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का समापन मानवता, सेवा एवं जीवनदायिनी भावना से ओत-प्रोत प्रेरक संदेश के साथ हुआ। इस अवसर पर सभी सहयोगी संस्थाओं का सम्मान किया गया था मंचासीन अतिथियों, केंद्रीय विभाग एवं क्षेत्रीय विभाग के अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।


